दिल्ली-एनसीआर में ठंड के साथ-साथ प्रदूषण का संकट भी गहराता जा रहा है। मंगलवार सुबह राजधानी और आसपास के इलाकों में घना कोहरा और स्मॉग छाया रहा, जिससे सड़कों पर दृश्यता लगभग शून्य हो गई। कई जगहों पर वाहन रेंगते नजर आए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘सीवियर’ श्रेणी में दर्ज किया गया है।
स्मॉग की मोटी चादर, सड़कों पर रेंगते वाहन
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सुबह से ही घना कोहरा छाया रहा। कम हवा की गति और अधिक नमी के कारण स्मॉग और कोहरे की परत और गहरी हो गई। कई मुख्य सड़कों पर विजिबिलिटी इतनी कम रही कि वाहन चालकों को हेडलाइट और फॉग लाइट जलाकर चलना पड़ा।
यातायात पुलिस के अनुसार, कुछ इलाकों में दृश्यता 50 मीटर से भी कम रही, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया।
अक्षरधाम समेत कई इलाकों में AQI ‘सीवियर’
CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में पहुंच गई है।
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अक्षरधाम: AQI 493
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सरदार पटेल मार्ग: AQI 483
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बड़ाखंबा रोड: AQI 474
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पंडित पंत मार्ग: AQI 417
इन इलाकों में स्मॉग की मोटी परत साफ दिखाई दी, जिससे इमारतें और सड़कें धुंध में गायब नजर आईं।
दिल्ली का औसत AQI 450 के आसपास
दिल्ली का समग्र AQI भी करीब 450 दर्ज किया गया, जो इस सर्दी की अब तक की सबसे खराब स्थितियों में से एक है। कम हवा, ठंड और कोहरे के कारण प्रदूषक वायुमंडल में फंस गए हैं। इसी वजह से ग्रैप (GRAP) के स्टेज-4 प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
इन प्रतिबंधों के तहत:
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निर्माण कार्यों पर रोक
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पुराने डीजल वाहनों की एंट्री बैन
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औद्योगिक गतिविधियों पर सख्ती
मौसम विभाग की चेतावनी: घना कोहरा रहेगा जारी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश में बहुत घना कोहरा बना रह सकता है।
IMD के अनुसार, 15 से 19 दिसंबर के बीच उत्तर भारत के बड़े हिस्से कोहरे की चपेट में रहेंगे, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है।
17 दिसंबर से बदलेगा मौसम, बढ़ेगी ठंड
मौसम विभाग ने बताया कि 17 दिसंबर की रात से एक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करेगा। इसके असर से:
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जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी होगी
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बर्फबारी के बाद उत्तर से ठंडी हवाएं चलेंगी
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मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है
बर्फबारी में देरी, जलवायु परिवर्तन का असर
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार पहाड़ों में बर्फबारी सामान्य से देर से हो रही है। आमतौर पर नवंबर के अंत या दिसंबर के पहले सप्ताह में बर्फबारी शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार देरी साफ तौर पर जलवायु परिवर्तन का संकेत है। हालांकि, आने वाला पश्चिमी विक्षोभ इस कमी को कुछ हद तक पूरा कर सकता है।
स्वास्थ्य के लिए खतरा, सावधानी जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि ‘सीवियर’ AQI बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। लोगों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, मास्क पहनने और घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष
दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल प्रदूषण से राहत की उम्मीद कम है। कोहरा और स्मॉग मिलकर हालात को और गंभीर बना रहे हैं। हालांकि, पहाड़ों में बर्फबारी के बाद ठंडी हवाएं चलने से आने वाले दिनों में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन तब तक सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
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